गोबर ने हेकड़ी के साथ कहा - लखनऊ गुलामी करने नहीं गया था। नौकरी है तो गुलामी। मैं व्यापार करता था।
ठाकुर ने कुतूहल-भरी आँखों से उसे सिर से पाँव तक देखा - कितना रोज पैदा करते थे?
गोबर ने छुरी को भाला बना कर उनके ऊपर चलाया - यही कोई ढाई-तीन रुपए मिल जाते थे। कभी चटक गई तो चार भी मिल गए। इससे बेसी नहीं।
झिंगुरी बहुत नोच-खसोट करके भी पचीस-तीस से ज्यादा न कमा पाते थे। और यह गँवार लौंडा सौ रुपए कमाने लगा। उनका मस्तक
गोबर ने हेकड़ी के साथ कहा - लखनऊ गुलामी करने नहीं गया था। नौकरी है तो गुलामी। मैं व्यापार करता था।
ठाकुर ने कुतूहल-भरी आँखों से उसे सिर से पाँव तक देखा - कितना रोज पैदा करते थे?
गोबर ने छुरी को भाला बना कर उनके ऊपर चलाया - यही कोई ढाई-तीन रुपए मिल जाते थे। कभी चटक गई तो चार भी मिल गए। इससे बेसी नहीं।
झिंगुरी बहुत नोच-खसोट करके भी पचीस-तीस से ज्यादा न कमा पाते थे। और यह गँवार लौंडा सौ रुपए कमाने लगा। उनका मस्तक