नीचा हो गया। अब किस दावे से उस पर रोब जमा सकते थे? वर्ण में वह जरूर ऊँचे हैं, लेकिन वर्ण कौन देखता है। उससे स्पर्धा करने का यह अवसर नहीं, अब तो उसकी चिरौरी करके उससे कुछ काम निकाला जा सकता है। बोले - इतनी कमाई कम नहीं है बेटा, जो खरच करते बने। गाँव में तो तीन आने भी नहीं मिलते। भवनिया (उनके जेठे पुत्र का नाम था) को भी कहीं कोई काम दिला दो, तो भेज दूँ। न पढ़े न लिखे, एक न एक उपद्रव करता रहता है। कहीं मुनीमी खाली हो तो कहना,
नीचा हो गया। अब किस दावे से उस पर रोब जमा सकते थे? वर्ण में वह जरूर ऊँचे हैं, लेकिन वर्ण कौन देखता है। उससे स्पर्धा करने का यह अवसर नहीं, अब तो उसकी चिरौरी करके उससे कुछ काम निकाला जा सकता है। बोले - इतनी कमाई कम नहीं है बेटा, जो खरच करते बने। गाँव में तो तीन आने भी नहीं मिलते। भवनिया (उनके जेठे पुत्र का नाम था) को भी कहीं कोई काम दिला दो, तो भेज दूँ। न पढ़े न लिखे, एक न एक उपद्रव करता रहता है। कहीं मुनीमी खाली हो तो कहना,