अध्याय 8
वैशाख में प्रेमा का विवाह दाननाथ के साथ हो गया। शादी बड़ी धूम-धाम से हुई। सारे शहर के रईसों को निमंत्रित किया। लाला बदरीप्रसाद ने दोनों हाथों से रुपए लुटाए। मगर दाननाथ की ओर से कोई तैयारी न थी। अमृतराय चंदा करने के लिए बिहार की ओर चले थे और ताकीद कर गए थे कि धूम-धाम मत करना। दाननाथ उनकी इच्छा की अवहेलना कैसे करते।
पूर्णा के आने से कमलाप्रसाद और सुमित्रा एक-दूसरे से और पृथक हो गए। सुमित्रा के हृदय पर लदा
अध्याय 8
वैशाख में प्रेमा का विवाह दाननाथ के साथ हो गया। शादी बड़ी धूम-धाम से हुई। सारे शहर के रईसों को निमंत्रित किया। लाला बदरीप्रसाद ने दोनों हाथों से रुपए लुटाए। मगर दाननाथ की ओर से कोई तैयारी न थी। अमृतराय चंदा करने के लिए बिहार की ओर चले थे और ताकीद कर गए थे कि धूम-धाम मत करना। दाननाथ उनकी इच्छा की अवहेलना कैसे करते।
पूर्णा के आने से कमलाप्रसाद और सुमित्रा एक-दूसरे से और पृथक हो गए। सुमित्रा के हृदय पर लदा