ने उसे सचेत कर दिया। वह तुरंत पत्र को वहीं फेंक कर अपने कमरे में लौट आई और खिड़की के सामने खड़ी हो कर फूट-फूट कर रोने लगी।'
संध्या हो गई थी। आकाश में एक-एक करके तारे निकलते आते थे। प्रेमा के हृदय में भी उसी प्रकार एक-एक करके स्मृतियाँ जागृत होने लगीं। देखते-देखते सारा गगन-मंडल तारों से जगमगा उठा। प्रेमा का हृदयाकाश भी स्मृतियों से आच्छन्न हो गया, पर इन असंख्य तारों से आकाश का अंधकार क्या और भी गहन नहीं हो गया था?
ने उसे सचेत कर दिया। वह तुरंत पत्र को वहीं फेंक कर अपने कमरे में लौट आई और खिड़की के सामने खड़ी हो कर फूट-फूट कर रोने लगी।'
संध्या हो गई थी। आकाश में एक-एक करके तारे निकलते आते थे। प्रेमा के हृदय में भी उसी प्रकार एक-एक करके स्मृतियाँ जागृत होने लगीं। देखते-देखते सारा गगन-मंडल तारों से जगमगा उठा। प्रेमा का हृदयाकाश भी स्मृतियों से आच्छन्न हो गया, पर इन असंख्य तारों से आकाश का अंधकार क्या और भी गहन नहीं हो गया था?