प्रतिज्ञा - Pratigya

एक विचित्र हिंसा के भाव से आंदोलित हो उठी। हिंसक पशुओं की आँखों में शिकार करते समय जो स्फूर्ति झलक उठती है, कुछ वैसी ही स्फूर्ति कमलाप्रसाद की आँखों में झलक उठी। वह पलंग से उठा और दोनों हाथ खोले हुए पूर्णा की ओर बढ़ा। अब तक पूर्णा भय से काँप रही थी। कमलाप्रसाद को अपनी ओर आते देख कर उसने गर्दन उठा कर आग्नेय नेत्रों से उसकी ओर देखा। उसकी दृष्टि में भीषण संकट तथा भय था, मानो वह कह रही थी - खबरदार। इधर एक जौ-भर भी बढ़े, तो


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एक विचित्र हिंसा के भाव से आंदोलित हो उठी। हिंसक पशुओं की आँखों में शिकार करते समय जो स्फूर्ति झलक उठती है, कुछ वैसी ही स्फूर्ति कमलाप्रसाद की आँखों में झलक उठी। वह पलंग से उठा और दोनों हाथ खोले हुए पूर्णा की ओर बढ़ा। अब तक पूर्णा भय से काँप रही थी। कमलाप्रसाद को अपनी ओर आते देख कर उसने गर्दन उठा कर आग्नेय नेत्रों से उसकी ओर देखा। उसकी दृष्टि में भीषण संकट तथा भय था, मानो वह कह रही थी - खबरदार। इधर एक जौ-भर भी बढ़े, तो


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