की प्रेरणा है। यदि ईश्वर की इच्छा न होती तो तुम इस घर में आती ही क्यों? इस वक्त तुम्हारा यहाँ आना भी ईश्वरीय प्रेरणा है, इसमें लेशमात्र भी संदेह न समझना। एक-से-एक सुंदरियाँ मैंने देखीं, मगर इस चंद्र में हृदय को खींचने वाली जो शक्ति है, वह किसी में नहीं पाई।'
कमलाप्रसाद को सहसा साड़ियों की याद आ गई। दोनों साड़ियाँ अभी तक उसने संदूक में रख छोड़ी थीं। उसने एक साड़ी निकाल कर पूर्णा के सामने रख दी और कहा - 'देखो, यह वही साड़ी है पूर्णा,
की प्रेरणा है। यदि ईश्वर की इच्छा न होती तो तुम इस घर में आती ही क्यों? इस वक्त तुम्हारा यहाँ आना भी ईश्वरीय प्रेरणा है, इसमें लेशमात्र भी संदेह न समझना। एक-से-एक सुंदरियाँ मैंने देखीं, मगर इस चंद्र में हृदय को खींचने वाली जो शक्ति है, वह किसी में नहीं पाई।'
कमलाप्रसाद को सहसा साड़ियों की याद आ गई। दोनों साड़ियाँ अभी तक उसने संदूक में रख छोड़ी थीं। उसने एक साड़ी निकाल कर पूर्णा के सामने रख दी और कहा - 'देखो, यह वही साड़ी है पूर्णा,