प्रतिज्ञा - Pratigya

उस दिन तुमने इसे अस्वीकार कर दिया था, आज इसे मेरी खातिर से स्वीकार कर लो। एक क्षण के लिए इसे पहन लो। तुम्हारी यह सफेद साड़ी देख कर मेरे हृदय में चोट-सी लगती है। मैं ईमान से कहता हूँ, यह तुम्हारे वास्ते लाया था। सुमित्रा के मन में कोई संदेह न हो, इसलिए एक और लानी पड़ी। नहीं, उठा कर रखो मत। केवल एक ही क्षण के लिए पहन लो। जरा मैं देखना चाहता हूँ कि इस रंग की साड़ी तुम्हें कितनी खिलती है। न मानोगी तो जर्बदस्ती पहना दूँगा।'


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उस दिन तुमने इसे अस्वीकार कर दिया था, आज इसे मेरी खातिर से स्वीकार कर लो। एक क्षण के लिए इसे पहन लो। तुम्हारी यह सफेद साड़ी देख कर मेरे हृदय में चोट-सी लगती है। मैं ईमान से कहता हूँ, यह तुम्हारे वास्ते लाया था। सुमित्रा के मन में कोई संदेह न हो, इसलिए एक और लानी पड़ी। नहीं, उठा कर रखो मत। केवल एक ही क्षण के लिए पहन लो। जरा मैं देखना चाहता हूँ कि इस रंग की साड़ी तुम्हें कितनी खिलती है। न मानोगी तो जर्बदस्ती पहना दूँगा।'


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