में उनका आदर बहुत कम जो जाएगा। बोली - 'वह स्वयं विवाह न करेंगे।'
प्रेमा - 'नहीं बहन, झूठ नहीं है। विवाह करने की इच्छा नहीं है। शायद कभी नहीं थी। दीदी के मर जाने के बाद, वह कुछ विरक्त-से हो गए थे। बाबूजी के बहुत घेरने पर और मुझ पर दया करके वह विवाह करने पर तैयार हुए थे, पर अब उनका विचार बदल गया है और मैं भी समझती हूँ कि जब एक आदमी स्वयं गृहस्थी के झंझट में न फँस कर कुछ सेवा करना चाहता है, तो उसके पाँव की बेड़ी न बनना चाहिए। मैं तुमसे सत्य कहती हूँ,
में उनका आदर बहुत कम जो जाएगा। बोली - 'वह स्वयं विवाह न करेंगे।'
प्रेमा - 'नहीं बहन, झूठ नहीं है। विवाह करने की इच्छा नहीं है। शायद कभी नहीं थी। दीदी के मर जाने के बाद, वह कुछ विरक्त-से हो गए थे। बाबूजी के बहुत घेरने पर और मुझ पर दया करके वह विवाह करने पर तैयार हुए थे, पर अब उनका विचार बदल गया है और मैं भी समझती हूँ कि जब एक आदमी स्वयं गृहस्थी के झंझट में न फँस कर कुछ सेवा करना चाहता है, तो उसके पाँव की बेड़ी न बनना चाहिए। मैं तुमसे सत्य कहती हूँ,