प्रतिज्ञा - Pratigya

पूर्णा, मुझे इसका दुःख नहीं है, उनकी देखा-देखी मैं भी कुछ कर जाऊँगी।'

प्रेमा - 'बिना कहे भी तो आदमी अपनी इच्छा प्रकट कर सकता है ।'

प्रेमा - 'नहीं पूर्णा, तुम्हारे पैरों पड़ती हूँ। पत्र-वत्र न लिखना, मैं किसी के शुभ-संकल्प में विघ्न न डालूँगी। मैं यदि और कोई सहायता नहीं कर सकती, तो कम-से-कम उनके मार्ग का कंटक न बनूँगी।'

प्रेमा - 'ऐसा कोई दुःख नहीं है, जो आदमी सह न सके। वह जानते हैं कि मुझे इससे दुःख नहीं, हर्ष होगा,


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पूर्णा, मुझे इसका दुःख नहीं है, उनकी देखा-देखी मैं भी कुछ कर जाऊँगी।'

प्रेमा - 'बिना कहे भी तो आदमी अपनी इच्छा प्रकट कर सकता है ।'

प्रेमा - 'नहीं पूर्णा, तुम्हारे पैरों पड़ती हूँ। पत्र-वत्र न लिखना, मैं किसी के शुभ-संकल्प में विघ्न न डालूँगी। मैं यदि और कोई सहायता नहीं कर सकती, तो कम-से-कम उनके मार्ग का कंटक न बनूँगी।'

प्रेमा - 'ऐसा कोई दुःख नहीं है, जो आदमी सह न सके। वह जानते हैं कि मुझे इससे दुःख नहीं, हर्ष होगा,


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