कमलाप्रसाद ने मुँह लटका कर कहा - 'पूर्णा, मैं तो मर जाऊँगा। सच कहता हूँ, मैं जहर खा कर सो रहूँगा, और हत्या तुम्हारे सिर जाएगी।'
यह अंतिम वाक्य पूर्णा ने सुना था या नहीं, हम नहीं कह सकते। उसने द्वार खोला और आँगन की ओर चली। कमलाप्रसाद द्वार पर खड़ा ताकता रहा। पूर्णा को रोकने का उसे साहस न हुआ। चिड़िया एक बार दाने पर आ कर फिर न जाने क्या आहट पा कर उड़ गई थी। इतनी ही देर में पूर्णा के मनोभावों में कितने रूपांतर हुए, वह खड़ा यही सोचता रहा। वह रोष,
कमलाप्रसाद ने मुँह लटका कर कहा - 'पूर्णा, मैं तो मर जाऊँगा। सच कहता हूँ, मैं जहर खा कर सो रहूँगा, और हत्या तुम्हारे सिर जाएगी।'
यह अंतिम वाक्य पूर्णा ने सुना था या नहीं, हम नहीं कह सकते। उसने द्वार खोला और आँगन की ओर चली। कमलाप्रसाद द्वार पर खड़ा ताकता रहा। पूर्णा को रोकने का उसे साहस न हुआ। चिड़िया एक बार दाने पर आ कर फिर न जाने क्या आहट पा कर उड़ गई थी। इतनी ही देर में पूर्णा के मनोभावों में कितने रूपांतर हुए, वह खड़ा यही सोचता रहा। वह रोष,