फिर वह हास-विलास, और अंत में यह विराग! यह रहस्य उसकी समझ में न आता था। क्या वह चिड़िया फिर दाने पर गिरेगी? यही प्रश्न कमलाप्रसाद के मस्तिष्क में बार-बार उठने लगा।
अध्याय 10
आदर्श हिंदू-बालिका की भाँति प्रेमा पति के घर आ कर पति की हो गई थी। अब अमृतराय उसके लिए केवल एक स्वप्न की भाँति थे, जो उसने कभी देखा था। वह गृह-कार्य में बड़ी कुशल थी। सारा दिन घर का कोई-न-कोई काम करती रहती। दाननाथ को सजावट का सामान खरीदने का शौक था,
फिर वह हास-विलास, और अंत में यह विराग! यह रहस्य उसकी समझ में न आता था। क्या वह चिड़िया फिर दाने पर गिरेगी? यही प्रश्न कमलाप्रसाद के मस्तिष्क में बार-बार उठने लगा।
अध्याय 10
आदर्श हिंदू-बालिका की भाँति प्रेमा पति के घर आ कर पति की हो गई थी। अब अमृतराय उसके लिए केवल एक स्वप्न की भाँति थे, जो उसने कभी देखा था। वह गृह-कार्य में बड़ी कुशल थी। सारा दिन घर का कोई-न-कोई काम करती रहती। दाननाथ को सजावट का सामान खरीदने का शौक था,