प्रतिज्ञा - Pratigya

बधाई देने जा रहा था। मगर डरता था कि तुम समझोगे यह नजर लगा रहा है।'

अमृतराय अपनी हँसी न रोक सके। दाननाथ को उन्होंने इतना मंद-बुद्धि कभी न समझा था। दाननाथ ने समझा - यह मेरी हँसी उड़ाना चाहते हैं। मैं मोटा हूँ, या दुबला हूँ, इनसे मतलब? यह कौन होते हैं पूछनेवाले? आप शायद यह सिद्ध करना चाहते हैं कि प्रेमा की स्नेहमय सेवा ने मुझे मोटा कर दिया। यही सही, तो आपको क्यों जलन होती है, क्या अब भी आपका उससे कुछ नाता है। मैले बर्तन


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बधाई देने जा रहा था। मगर डरता था कि तुम समझोगे यह नजर लगा रहा है।'

अमृतराय अपनी हँसी न रोक सके। दाननाथ को उन्होंने इतना मंद-बुद्धि कभी न समझा था। दाननाथ ने समझा - यह मेरी हँसी उड़ाना चाहते हैं। मैं मोटा हूँ, या दुबला हूँ, इनसे मतलब? यह कौन होते हैं पूछनेवाले? आप शायद यह सिद्ध करना चाहते हैं कि प्रेमा की स्नेहमय सेवा ने मुझे मोटा कर दिया। यही सही, तो आपको क्यों जलन होती है, क्या अब भी आपका उससे कुछ नाता है। मैले बर्तन


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