कुछ हरे अवश्य थे। चेहरे पर कुछ सुर्खी थी। देह भी कुछ चिकनी हो गई थी। मगर यह कहने की बात थी। माताओं को तो अपने लड़के सदैव ही दुबले मालूम होते हैं, लेकिन दाननाथ भी इस विषय में कुछ वहमी जीव थे। उन्हें हमेशा किसी-न-किसी बीमारी की शिकायत बनी रहती थी। कभी खाना नहीं हजम हुआ, खट्टी डकारें आ रही हैं, कभी सिर में चक्कर आ रहा है, कभी पैर का तलवा जल रहा है। इस तरह ये शिकायतें बढ़ गई थीं। कहीं बाहर जाते, तो उन्हें कोई शिकायत न होती,
कुछ हरे अवश्य थे। चेहरे पर कुछ सुर्खी थी। देह भी कुछ चिकनी हो गई थी। मगर यह कहने की बात थी। माताओं को तो अपने लड़के सदैव ही दुबले मालूम होते हैं, लेकिन दाननाथ भी इस विषय में कुछ वहमी जीव थे। उन्हें हमेशा किसी-न-किसी बीमारी की शिकायत बनी रहती थी। कभी खाना नहीं हजम हुआ, खट्टी डकारें आ रही हैं, कभी सिर में चक्कर आ रहा है, कभी पैर का तलवा जल रहा है। इस तरह ये शिकायतें बढ़ गई थीं। कहीं बाहर जाते, तो उन्हें कोई शिकायत न होती,