दाननाथ - 'अच्छी नहीं, पत्थर है। बलगम भरा हुआ है। महीने भर कसरत छोड़ दें, तो उठना-बैठना दूभर हो जाए।'
दाननाथ - 'मेरे साथ खेलते थे, तो रुला-रुला मारता था।'
लेकिन दाननाथ जहाँ विरोधी स्वभाव के मनुष्य थे, वहाँ कुछ दुराग्रही भी थे। जिस मनुष्य के पीछे उनका अपनी ही पत्नी के हाथों इतना घोर अपमान हुआ, उसे वह सस्ते नहीं छोड़ सकते। सारा संसार अमृतराय का यश गाता, उन्हें कोई परवाह न थी, नहीं तो वह भी उस स्वर में अपना स्वर मिला सकते थे,
दाननाथ - 'अच्छी नहीं, पत्थर है। बलगम भरा हुआ है। महीने भर कसरत छोड़ दें, तो उठना-बैठना दूभर हो जाए।'
दाननाथ - 'मेरे साथ खेलते थे, तो रुला-रुला मारता था।'
लेकिन दाननाथ जहाँ विरोधी स्वभाव के मनुष्य थे, वहाँ कुछ दुराग्रही भी थे। जिस मनुष्य के पीछे उनका अपनी ही पत्नी के हाथों इतना घोर अपमान हुआ, उसे वह सस्ते नहीं छोड़ सकते। सारा संसार अमृतराय का यश गाता, उन्हें कोई परवाह न थी, नहीं तो वह भी उस स्वर में अपना स्वर मिला सकते थे,