वह भी करतल-ध्वनि कर सकते थे, पर उनकी पत्नी अमृतराय के प्रति इतनी श्रद्धा रखे और केवल हृदय में न रख कर उसकी दुहाई देती फिरे, जरा भी चिंता न करे कि इसका पति पर क्या प्रभाव होगा, यह स्थिति दुस्सह थी। अमृतराय अगर बोल सकते हैं, तो दाननाथ भी बोलने का अभ्यास करेंगे और अमृतराय का गर्व मर्दन कर देंगे, उसके साथ ही प्रेमा का भी। वह प्रेमा को दिखा देंगे कि जिन गुणों के लिए तू अमृतराय को पूज्य समझती है, वे गुण मुझमें भी हैं, और अधिक मात्रा में।
वह भी करतल-ध्वनि कर सकते थे, पर उनकी पत्नी अमृतराय के प्रति इतनी श्रद्धा रखे और केवल हृदय में न रख कर उसकी दुहाई देती फिरे, जरा भी चिंता न करे कि इसका पति पर क्या प्रभाव होगा, यह स्थिति दुस्सह थी। अमृतराय अगर बोल सकते हैं, तो दाननाथ भी बोलने का अभ्यास करेंगे और अमृतराय का गर्व मर्दन कर देंगे, उसके साथ ही प्रेमा का भी। वह प्रेमा को दिखा देंगे कि जिन गुणों के लिए तू अमृतराय को पूज्य समझती है, वे गुण मुझमें भी हैं, और अधिक मात्रा में।