प्रतिज्ञा - Pratigya



प्रेमा ने पूछा - 'क्या आज तुम्हारा व्याख्यान है? तुम तो पहले कभी नहीं बोले।'

प्रेमा - 'मुझे तो तुमने सुनाई ही नहीं। मैं भी जाऊँगी। देखूँ तुम कैसा बोलते हो?'

प्रेमा- 'लाला जी ने तुम्हें आखिर अपनी ओर घसीट ही लिया?'

प्रेमा ने दबी जबान से कहा - 'अब तक वह तुम्हें अपना सहायक समझते थे। यह नोटिस पढ़ कर चकित हो गए होंगे।'

दाननाथ - 'नहीं, अभी मेरे सामने कर दो। तुम्हें गाते-बजाते मंदिर तक जाना पड़ेगा।'

रात के आठ बज रहे


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प्रेमा ने पूछा - 'क्या आज तुम्हारा व्याख्यान है? तुम तो पहले कभी नहीं बोले।'

प्रेमा - 'मुझे तो तुमने सुनाई ही नहीं। मैं भी जाऊँगी। देखूँ तुम कैसा बोलते हो?'

प्रेमा- 'लाला जी ने तुम्हें आखिर अपनी ओर घसीट ही लिया?'

प्रेमा ने दबी जबान से कहा - 'अब तक वह तुम्हें अपना सहायक समझते थे। यह नोटिस पढ़ कर चकित हो गए होंगे।'

दाननाथ - 'नहीं, अभी मेरे सामने कर दो। तुम्हें गाते-बजाते मंदिर तक जाना पड़ेगा।'

रात के आठ बज रहे


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