प्रतिज्ञा - Pratigya

कर पहले ही से भरी बैठी थी। यह प्रश्न चिनगारी का काम कर गया, मगर कहती क्या? दिल में ऐंठ कर रह गई। बोली - 'मैं इन झगड़ों में नहीं पड़ती। आप जानें और वह जानें। मैं दोनों तरफ का तमाशा देखूँगी। कहिए, अम्माँ जी तो कुशल से हैं। भाभीजी आजकल क्यों रूठी हुई हैं? मेरे पास कई दिन हुए एक खत भेजा था कि मैं बहुत जल्द मैके चली जाऊँगी।'

कमलाप्रसाद चला गया। दाननाथ भी उनके साथ बाहर आए और दोनों बातें करते हुए बड़ी दूर तक चले गए।

दाननाथ


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कर पहले ही से भरी बैठी थी। यह प्रश्न चिनगारी का काम कर गया, मगर कहती क्या? दिल में ऐंठ कर रह गई। बोली - 'मैं इन झगड़ों में नहीं पड़ती। आप जानें और वह जानें। मैं दोनों तरफ का तमाशा देखूँगी। कहिए, अम्माँ जी तो कुशल से हैं। भाभीजी आजकल क्यों रूठी हुई हैं? मेरे पास कई दिन हुए एक खत भेजा था कि मैं बहुत जल्द मैके चली जाऊँगी।'

कमलाप्रसाद चला गया। दाननाथ भी उनके साथ बाहर आए और दोनों बातें करते हुए बड़ी दूर तक चले गए।

दाननाथ


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