दाननाथ - 'सोचता हूँ, मुझ-सा भाग्यवान संसार में दूसरा कौन होगा?'
दाननाथ - 'तुम देवी हो।'
छः दिन बीत गए। कमलाप्रसाद और उनके मित्र-वृंद रोज आते और शहर की खबरें सुना जाते। किन-किन रईसों को तोड़ा गया, किन-किन अधिकारियों को फाँसा गया, किन-किन मुहल्लों पर धावा हुआ, किस-किस कचहरी, किस-किस दफ्तर पर चढ़ाई हुई, यह सारी रिपोर्ट दाननाथ को सुनाई जाती। आज यह भी मालूम हो गया कि साहब बहादुर ने अमृतराय को जमीन देने से इनकार कर दिया
दाननाथ - 'सोचता हूँ, मुझ-सा भाग्यवान संसार में दूसरा कौन होगा?'
दाननाथ - 'तुम देवी हो।'
छः दिन बीत गए। कमलाप्रसाद और उनके मित्र-वृंद रोज आते और शहर की खबरें सुना जाते। किन-किन रईसों को तोड़ा गया, किन-किन अधिकारियों को फाँसा गया, किन-किन मुहल्लों पर धावा हुआ, किस-किस कचहरी, किस-किस दफ्तर पर चढ़ाई हुई, यह सारी रिपोर्ट दाननाथ को सुनाई जाती। आज यह भी मालूम हो गया कि साहब बहादुर ने अमृतराय को जमीन देने से इनकार कर दिया