प्रतिज्ञा - Pratigya

थीं। दोनों चिक की आड़ में आ खड़ी हुईं। भीड़ इतनी थी और इतने शोहदे जमा थे कि प्रेमा को मंच की ओर जाने का साहस न हुआ।

कई आदमियों ने चिल्ला कर कहा - 'धर्म का द्रोही है।'

कई आवाजें - 'और क्या हो तुम? बताओ कौन-कौन से वेद पढ़े हो?'

अमृतराय ने फिर कहा - 'मैं जानता हूँ, कुछ लोग यहाँ सभा की कार्यवाही में विघ्न डालने का निश्चय करके आए हैं। जिन लोगों ने उन्हें सिखा-पढ़ा कर भेजा है, उन्हें मैं जानता हूँ।'

अमृतराय के पक्ष


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थीं। दोनों चिक की आड़ में आ खड़ी हुईं। भीड़ इतनी थी और इतने शोहदे जमा थे कि प्रेमा को मंच की ओर जाने का साहस न हुआ।

कई आदमियों ने चिल्ला कर कहा - 'धर्म का द्रोही है।'

कई आवाजें - 'और क्या हो तुम? बताओ कौन-कौन से वेद पढ़े हो?'

अमृतराय ने फिर कहा - 'मैं जानता हूँ, कुछ लोग यहाँ सभा की कार्यवाही में विघ्न डालने का निश्चय करके आए हैं। जिन लोगों ने उन्हें सिखा-पढ़ा कर भेजा है, उन्हें मैं जानता हूँ।'

अमृतराय के पक्ष


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