दे सकते हैं। उनको देख कर बाबुओं को भी जोश आया। जो केवल तमाशा देखने आए थे, वे भी कुछ-न-कुछ दे गए। जन-समूह विचार से नहीं, आवेश से काम करता है। समूह में ही अच्छे कामों का नाश होता है और बुरे कामों का भी। कितने मनुष्य तो घर से रुपए लाए। सोने की अंगूठियों, ताबीजों और कंठों का ढेर लग गया, जो गुंडों की कीर्ति को उज्ज्वल कर रहा था। दस-बीस गुंडे तो प्रेमा के चरण छू कर घर गए। वे इतने प्रसन्न थे, मानो तीर्थ करके लौटे हों।
प्रेमा ने हँस कर कहा - 'जब इन उजड्डों को मना लिया,
दे सकते हैं। उनको देख कर बाबुओं को भी जोश आया। जो केवल तमाशा देखने आए थे, वे भी कुछ-न-कुछ दे गए। जन-समूह विचार से नहीं, आवेश से काम करता है। समूह में ही अच्छे कामों का नाश होता है और बुरे कामों का भी। कितने मनुष्य तो घर से रुपए लाए। सोने की अंगूठियों, ताबीजों और कंठों का ढेर लग गया, जो गुंडों की कीर्ति को उज्ज्वल कर रहा था। दस-बीस गुंडे तो प्रेमा के चरण छू कर घर गए। वे इतने प्रसन्न थे, मानो तीर्थ करके लौटे हों।
प्रेमा ने हँस कर कहा - 'जब इन उजड्डों को मना लिया,