ने उसका आँचल पकड़ लिया - 'भागती कहाँ हो? जरा तमाशा देखो! क्या शेर हैं जो खा जाएँगे।'
सुमित्रा - 'कुवचन कह बैठेंगे, तो कुवचन सुनेंगे।'
सुमित्रा - हाथ क्या चला देंगे, कोई हँसी है? फिर सूरत न देखूँगी।
कमलाप्रसाद ने कमरे में कदम रखते ही कठोर स्वर में कहा - 'बैठी गप्पें लड़ा रही हो। जरा-सी अचकन माँग भेजी, तो उठते न बना। बाप से कहा होता, किसी करोड़पति सेठ के घर ब्याहते। यहाँ का हाल तो जानते थे।'
कमलाप्रसाद - 'तुम तो बड़ी समझदार थीं, तुम्हीं ने पता लगा लिया होता।'
ने उसका आँचल पकड़ लिया - 'भागती कहाँ हो? जरा तमाशा देखो! क्या शेर हैं जो खा जाएँगे।'
सुमित्रा - 'कुवचन कह बैठेंगे, तो कुवचन सुनेंगे।'
सुमित्रा - हाथ क्या चला देंगे, कोई हँसी है? फिर सूरत न देखूँगी।
कमलाप्रसाद ने कमरे में कदम रखते ही कठोर स्वर में कहा - 'बैठी गप्पें लड़ा रही हो। जरा-सी अचकन माँग भेजी, तो उठते न बना। बाप से कहा होता, किसी करोड़पति सेठ के घर ब्याहते। यहाँ का हाल तो जानते थे।'
कमलाप्रसाद - 'तुम तो बड़ी समझदार थीं, तुम्हीं ने पता लगा लिया होता।'