मुदा बाबूजी से न पिटावें। अस घूंसा मारत हैं सरकार कि कोस-भर लै धमाका सुनात है।'
कहार - 'अरे सरकार, जो ई होत त का पूछै का रहा। मेहरिया अस गुनन की पूरी मिली है कि बात पीछू करत है, झाड़ू पहले चलावत है। जो सरकार, सुन-भर पावे कि कौनो दुसरी मेहरिया से हँसत रहा, तो खड़े लील जाए, सरकार, खड़ै लील जाए! थर-थर काँपित है, बहूजी से तौर इतना नहीं डेराइत है।'
कहार - 'जाइत है सरकार, आज भले का मुँह नहीं देखा जान परत है।'
सुमित्रा
मुदा बाबूजी से न पिटावें। अस घूंसा मारत हैं सरकार कि कोस-भर लै धमाका सुनात है।'
कहार - 'अरे सरकार, जो ई होत त का पूछै का रहा। मेहरिया अस गुनन की पूरी मिली है कि बात पीछू करत है, झाड़ू पहले चलावत है। जो सरकार, सुन-भर पावे कि कौनो दुसरी मेहरिया से हँसत रहा, तो खड़े लील जाए, सरकार, खड़ै लील जाए! थर-थर काँपित है, बहूजी से तौर इतना नहीं डेराइत है।'
कहार - 'जाइत है सरकार, आज भले का मुँह नहीं देखा जान परत है।'
सुमित्रा