प्रतिज्ञा - Pratigya

हो गई? इसी मूँछ से। जो आदमी मुझ जैसी भोली-भाली स्त्री को आज तक अपनी मुट्ठी में न कर सका, वह समझदार नहीं, मूर्ख भी नहीं, बैल है। आखिर मैं क्यों इनकी धौंस सहूँ। जो दस बातें प्यार की करे, उसकी एक धौंस भी सह ली जाती। जिसकी तलवार सदा म्यान से बाहर रहती हो, उसकी कोई कहाँ तक सहे?'

सुमित्रा - 'मेरी बला रोए। हाँ, तुम रोओगे।'

सुमित्रा तिलमिला उठी। इस चोट का वह इतना ही कठोर उत्तर न दे सकती थी। वह यह कह न सकती थी कि मैं भी हजार


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हो गई? इसी मूँछ से। जो आदमी मुझ जैसी भोली-भाली स्त्री को आज तक अपनी मुट्ठी में न कर सका, वह समझदार नहीं, मूर्ख भी नहीं, बैल है। आखिर मैं क्यों इनकी धौंस सहूँ। जो दस बातें प्यार की करे, उसकी एक धौंस भी सह ली जाती। जिसकी तलवार सदा म्यान से बाहर रहती हो, उसकी कोई कहाँ तक सहे?'

सुमित्रा - 'मेरी बला रोए। हाँ, तुम रोओगे।'

सुमित्रा तिलमिला उठी। इस चोट का वह इतना ही कठोर उत्तर न दे सकती थी। वह यह कह न सकती थी कि मैं भी हजार


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