प्रतिज्ञा - Pratigya

उसी तरह जैसे तुम मेरे प्राणों की रक्षा करती हो।'

'तो प्रिये, यह गाँठ में बाँध लो कि कमलाप्रसाद विरह-वेदना सहने के लिए जीवित नहीं रह सकता।'

कमलाप्रसाद ने आवेश में आ कर कहा - 'अच्छा अब चुप रहो, पूर्णा। ऐसी बातों से मुझे मानसिक कष्ट हो रहा है। तुम समझ रही हो कि मैं अपनी नीच वासना की तृप्ति के लिए तुम्हें मायाजाल में फँसा रहा हूँ। यह तुम मेरे साथ घोर अन्याय कर रही हो। तुम्हें कैसे विश्वास दिलाऊँ कि यह मायाजाल नहीं, शुद्ध आत्म-समर्पण है। यदि इसका प्रमाण चाहती हो,


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उसी तरह जैसे तुम मेरे प्राणों की रक्षा करती हो।'

'तो प्रिये, यह गाँठ में बाँध लो कि कमलाप्रसाद विरह-वेदना सहने के लिए जीवित नहीं रह सकता।'

कमलाप्रसाद ने आवेश में आ कर कहा - 'अच्छा अब चुप रहो, पूर्णा। ऐसी बातों से मुझे मानसिक कष्ट हो रहा है। तुम समझ रही हो कि मैं अपनी नीच वासना की तृप्ति के लिए तुम्हें मायाजाल में फँसा रहा हूँ। यह तुम मेरे साथ घोर अन्याय कर रही हो। तुम्हें कैसे विश्वास दिलाऊँ कि यह मायाजाल नहीं, शुद्ध आत्म-समर्पण है। यदि इसका प्रमाण चाहती हो,


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