प्रतिज्ञा - Pratigya

मगर ईश्वर ने चाहा तो उनका आश्रम बन कर तैयार न हो सकेगा। सारे शहर में उन्हें कौड़ी भर की मदद न मिलेगी। (घड़ी की ओर देख कर) अरे! दो बज रहे हैं अब विलंब नहीं करना चाहिए। आओ, उस दीपक के सामने ईश्वर को साक्षी करके हम शपथ खाएँ कि जीवन-पर्यंत हम पति-पत्नी व्रत का पालन करेंगे।'

यह कहती हुई वह किवाड़ खोल कर तेजी से बाहर निकल गई और कमलाप्रसाद खड़े ताकते रह गए। चिड़िया दाना चुगते-चुगते समीप आ गई थी; पर ज्यों ही शिकारी ने हाथ चलाया,


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मगर ईश्वर ने चाहा तो उनका आश्रम बन कर तैयार न हो सकेगा। सारे शहर में उन्हें कौड़ी भर की मदद न मिलेगी। (घड़ी की ओर देख कर) अरे! दो बज रहे हैं अब विलंब नहीं करना चाहिए। आओ, उस दीपक के सामने ईश्वर को साक्षी करके हम शपथ खाएँ कि जीवन-पर्यंत हम पति-पत्नी व्रत का पालन करेंगे।'

यह कहती हुई वह किवाड़ खोल कर तेजी से बाहर निकल गई और कमलाप्रसाद खड़े ताकते रह गए। चिड़िया दाना चुगते-चुगते समीप आ गई थी; पर ज्यों ही शिकारी ने हाथ चलाया,


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