प्रतिज्ञा - Pratigya

यही सारा रहस्य है। न्याय तो हम तब समझते, जब पुरूषों को भी यही निषेध होता।'

'और क्या? धूर्तों का पाखंड है।'

'केवल इसलिए कि उनका चरित्र अच्छा नहीं। वह विवाह-बंधन में न पड़ कर छूटे साँड़ बने रहना चाहते हैं। उनका विधवाश्रम केवल उनका भोगालय होगा, इसीलिए हम उनका विरोध कर रहे हैं। यदि वह विधवा से विवाह करना चाहते हैं, तो देश में विधवाओं की कमी है? पर वह विवाह न करेंगे। बाजे आदमियों को टट्टी की आड़ से शिकार खेलने में ही मजा आता है,


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यही सारा रहस्य है। न्याय तो हम तब समझते, जब पुरूषों को भी यही निषेध होता।'

'और क्या? धूर्तों का पाखंड है।'

'केवल इसलिए कि उनका चरित्र अच्छा नहीं। वह विवाह-बंधन में न पड़ कर छूटे साँड़ बने रहना चाहते हैं। उनका विधवाश्रम केवल उनका भोगालय होगा, इसीलिए हम उनका विरोध कर रहे हैं। यदि वह विधवा से विवाह करना चाहते हैं, तो देश में विधवाओं की कमी है? पर वह विवाह न करेंगे। बाजे आदमियों को टट्टी की आड़ से शिकार खेलने में ही मजा आता है,


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