देने के लिए उसका जन्म हुआ है? स्वर्ग और नरक सब ढकोसला है। अब इससे दुःखदाई नरक क्या होगा? जब नरक ही में रहना है, तो नरक ही सही। कम-से-कम जीवन के कुछ दिन आनंद से कटेंगे; जीवन का कुछ सुख तो मिलेगा। जिससे प्रेम हो, वही अपना सब कुछ। विवाह और संस्कार सब दिखावा है? चार अक्षर संस्कृत पढ़ लेने से क्या होता है? मतलब तो यही है न किसी प्रकार स्त्री का पालन-पोषण हो। उँह, इस चिंता में क्यों कोई मरे? विवाह क्या स्त्री को पुरुष से बाँध
देने के लिए उसका जन्म हुआ है? स्वर्ग और नरक सब ढकोसला है। अब इससे दुःखदाई नरक क्या होगा? जब नरक ही में रहना है, तो नरक ही सही। कम-से-कम जीवन के कुछ दिन आनंद से कटेंगे; जीवन का कुछ सुख तो मिलेगा। जिससे प्रेम हो, वही अपना सब कुछ। विवाह और संस्कार सब दिखावा है? चार अक्षर संस्कृत पढ़ लेने से क्या होता है? मतलब तो यही है न किसी प्रकार स्त्री का पालन-पोषण हो। उँह, इस चिंता में क्यों कोई मरे? विवाह क्या स्त्री को पुरुष से बाँध