देता है? वह भी मन मिले ही का सौदा है। स्त्री और पुरुष का मन न मिला तो विवाह क्या मिला देगा? बिना विवाह हुए स्त्री-पुरुष आजीवन प्रेम से रहते हैं। कुत्सित भावनाओं में पूर्णा ने भोर कर दिया।
सुमित्रा ने तीव्र स्वर में कहा - 'नींद आई ही किसे थी?'
सुमित्रा - 'क्या तुमने अभी तक उनकी चाह नहीं पाई? तुम तो इन बातों में चतुर हो।'
सुमित्रा - 'पहले मैं भी ऐसा ही समझती थी पर अब मालूम हुआ कि मुझे धोखा हुआ था।'
सुमित्रा - 'हाँ,
देता है? वह भी मन मिले ही का सौदा है। स्त्री और पुरुष का मन न मिला तो विवाह क्या मिला देगा? बिना विवाह हुए स्त्री-पुरुष आजीवन प्रेम से रहते हैं। कुत्सित भावनाओं में पूर्णा ने भोर कर दिया।
सुमित्रा ने तीव्र स्वर में कहा - 'नींद आई ही किसे थी?'
सुमित्रा - 'क्या तुमने अभी तक उनकी चाह नहीं पाई? तुम तो इन बातों में चतुर हो।'
सुमित्रा - 'पहले मैं भी ऐसा ही समझती थी पर अब मालूम हुआ कि मुझे धोखा हुआ था।'
सुमित्रा - 'हाँ,