प्रतिज्ञा - Pratigya

पानी में रह कर हलकोरों से बचे रहना तुम्हारी शक्ति के बाहर था। बे-लंगर की नाव लहरों में स्थिर नहीं रह सकती। पड़े हुए धन को उठा लेने में किसे संकोच होता है? मैंने अपनी आँखों सब कुछ देख लिया है पूर्णा। तुम दुलक नहीं सकती। मैं जो कुछ कह रही हूँ तुम्हारे ही भले के लिए कह रही हूँ। अब भी अगर बच सकती हो तो उस कुकर्मी का साया भी अपने ऊपर न पड़ने दो। यह न समझो कि मैं अपने लिए, अपने पहलू का काँटा निकालने के लिए तुमसे ये बातें कर


236 of 305

पानी में रह कर हलकोरों से बचे रहना तुम्हारी शक्ति के बाहर था। बे-लंगर की नाव लहरों में स्थिर नहीं रह सकती। पड़े हुए धन को उठा लेने में किसे संकोच होता है? मैंने अपनी आँखों सब कुछ देख लिया है पूर्णा। तुम दुलक नहीं सकती। मैं जो कुछ कह रही हूँ तुम्हारे ही भले के लिए कह रही हूँ। अब भी अगर बच सकती हो तो उस कुकर्मी का साया भी अपने ऊपर न पड़ने दो। यह न समझो कि मैं अपने लिए, अपने पहलू का काँटा निकालने के लिए तुमसे ये बातें कर


236 of 305