प्रतिज्ञा - Pratigya

रही हूँ मैं जैसी तब थी वैसी ही अब हूँ। मेरे लिए 'जैसे कांता घर रहे वैसे रहे विदेश।' मुझे तुम्हारी चिंता है। यह पिशाच तुम्हें कहीं का न रखेगा। मैं तुम्हें एक सलाह देती हूँ। कहो कहूँ, कहो न कहूँ?'

सुमित्रा बोली - 'उससे तुम साफ-साफ कह दो कि वह तुमसे विवाह कर ले।'

सुमित्रा - 'विवाह में केवल एक बार की जग-हँसाई है फिर कोई कुछ न कह सकेगा। इस भाँति लुक-छिप कर मिलना तो आत्मा और परलोक दोनों ही का सर्वनाश कर देगा। उसके प्रेम


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रही हूँ मैं जैसी तब थी वैसी ही अब हूँ। मेरे लिए 'जैसे कांता घर रहे वैसे रहे विदेश।' मुझे तुम्हारी चिंता है। यह पिशाच तुम्हें कहीं का न रखेगा। मैं तुम्हें एक सलाह देती हूँ। कहो कहूँ, कहो न कहूँ?'

सुमित्रा बोली - 'उससे तुम साफ-साफ कह दो कि वह तुमसे विवाह कर ले।'

सुमित्रा - 'विवाह में केवल एक बार की जग-हँसाई है फिर कोई कुछ न कह सकेगा। इस भाँति लुक-छिप कर मिलना तो आत्मा और परलोक दोनों ही का सर्वनाश कर देगा। उसके प्रेम


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