प्रतिज्ञा - Pratigya

जरूर प्राण दे दो। कल देते हो तो आज ही दे दो। तुमसे न बने तो लाओ मैं मौत के घाट उतार दूँ। इन धूर्त लंपटों का यह भी एक लटका है। इसी तरह प्रेम जता कर ये रमणियों पर अपना रंग जमाते हैं। ऐसे बेहया मरा नहीं करते। मरते हैं वे, जिनमें सत्य का बल होता है। ऐसे विषय-वासना के पुतले मर जाएँ, तो संसार स्वर्ग हो जाए। ये दुष्ट वेश्याओं के पास नहीं जाते। वहाँ जाते इनकी नानी मरती है। पहले तो वेश्या देवी भरपूर पूजा लिए सीधे मुँह बात नहीं करती,


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जरूर प्राण दे दो। कल देते हो तो आज ही दे दो। तुमसे न बने तो लाओ मैं मौत के घाट उतार दूँ। इन धूर्त लंपटों का यह भी एक लटका है। इसी तरह प्रेम जता कर ये रमणियों पर अपना रंग जमाते हैं। ऐसे बेहया मरा नहीं करते। मरते हैं वे, जिनमें सत्य का बल होता है। ऐसे विषय-वासना के पुतले मर जाएँ, तो संसार स्वर्ग हो जाए। ये दुष्ट वेश्याओं के पास नहीं जाते। वहाँ जाते इनकी नानी मरती है। पहले तो वेश्या देवी भरपूर पूजा लिए सीधे मुँह बात नहीं करती,


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