उससे मिलने के लिए चित्त लालायित हो रहा था। न जाने क्यों बुलाया है? इतनी जल्दी बुलाया है तो अवश्य कोई जरूरी काम होगा। रास्ते भर की बात है, इनके साथ जाने में हरज ही क्या है? वहाँ दो-चार दिन रहने से दिल बहल जाएगा। इन महाशय से पिंड छूट जाएगा। यह सोच कर उसने कहा - 'आप क्यों कष्ट कीजिएगा। मैं अकेली चली जाऊँगी।'
पूर्णा अब कोई आपत्ति न कर सकी। बोली - 'तो कब जाइएगा?'
पूर्णा भी चटपट तैयार हो गई। कमलाप्रसाद चला गया तो उसने सुमित्रा
उससे मिलने के लिए चित्त लालायित हो रहा था। न जाने क्यों बुलाया है? इतनी जल्दी बुलाया है तो अवश्य कोई जरूरी काम होगा। रास्ते भर की बात है, इनके साथ जाने में हरज ही क्या है? वहाँ दो-चार दिन रहने से दिल बहल जाएगा। इन महाशय से पिंड छूट जाएगा। यह सोच कर उसने कहा - 'आप क्यों कष्ट कीजिएगा। मैं अकेली चली जाऊँगी।'
पूर्णा अब कोई आपत्ति न कर सकी। बोली - 'तो कब जाइएगा?'
पूर्णा भी चटपट तैयार हो गई। कमलाप्रसाद चला गया तो उसने सुमित्रा