लज्जित हो कर कहा - 'तुमने कैसे समझ लिया कि मैं तुम्हें नीच और भ्रष्ट समझती हूँ?'
पूर्णा के हृदय से सुमित्रा का जादू उतरने लगा। अस्थिरता दुर्बल आत्माओं का मुख्य लक्षण है। उन पर न बातों को जमते देर लगती है न मिटते। बोली - 'वह तो सारा अपराध तुम्हारा ही बताती हैं।'
'सैकड़ों बातें कीं, कहाँ तक कहूँ? याद भी तो नहीं।'
'जगह तो बुरी नहीं।'
'सुमित्रा भी रहने पर राजी हों तब न।'
'तो मैं अकेली यहाँ कैसे रहूँ।'
यह कहते-कहते
लज्जित हो कर कहा - 'तुमने कैसे समझ लिया कि मैं तुम्हें नीच और भ्रष्ट समझती हूँ?'
पूर्णा के हृदय से सुमित्रा का जादू उतरने लगा। अस्थिरता दुर्बल आत्माओं का मुख्य लक्षण है। उन पर न बातों को जमते देर लगती है न मिटते। बोली - 'वह तो सारा अपराध तुम्हारा ही बताती हैं।'
'सैकड़ों बातें कीं, कहाँ तक कहूँ? याद भी तो नहीं।'
'जगह तो बुरी नहीं।'
'सुमित्रा भी रहने पर राजी हों तब न।'
'तो मैं अकेली यहाँ कैसे रहूँ।'
यह कहते-कहते