'ताँगा लौटा दो, नहीं मैं कूद पड़ूँगी।'
पूर्णा ने संशक नेत्रों से कमलाप्रसाद को देखा। वह उसे निर्जन स्थान में क्यों ले आया है? क्या उसने मन में कुछ और ठानी है? नहीं, वह इतना नीच, इतना अधम नहीं हो सकता और बगीचे पर, दस-पाँच मिनट रूक जाने ही में क्या बिगड़ जाएगा? आखिर वहाँ भी तो नौकर-चाकर होंगे।'
पूर्णा ने कौशल से आत्म-रक्षा करने की ठानी थी। बोली - 'प्रेमा मेरी राह देख रही होगी। इसी से जल्दी कर रही थी।'
पूर्णा ने
'ताँगा लौटा दो, नहीं मैं कूद पड़ूँगी।'
पूर्णा ने संशक नेत्रों से कमलाप्रसाद को देखा। वह उसे निर्जन स्थान में क्यों ले आया है? क्या उसने मन में कुछ और ठानी है? नहीं, वह इतना नीच, इतना अधम नहीं हो सकता और बगीचे पर, दस-पाँच मिनट रूक जाने ही में क्या बिगड़ जाएगा? आखिर वहाँ भी तो नौकर-चाकर होंगे।'
पूर्णा ने कौशल से आत्म-रक्षा करने की ठानी थी। बोली - 'प्रेमा मेरी राह देख रही होगी। इसी से जल्दी कर रही थी।'
पूर्णा ने