को दौड़ा गया था। एक घंटे के बाद सड़क पर से एक बग्घी निकली। मालूम हुआ, बदरीप्रसाद आ गए। आपस में क्या बातें हो रही होंगी? शायद थाने में उसकी इत्तला की गई हो। बगीचे से एक ताँगा निकलता हुआ दिखाई दिया। शायद वह डॉक्टर होगा। चोट तो ऐसी नहीं आई लेकिन बड़े आदमियों के लिए जरा-सी बात बहुत हो जाती है।
अध्याय 13
इस वक्त पूर्णा को अपनी उद्दंडता पर पश्चाताप हुआ। उसने अगर जरा धैर्य से काम लिया होता तो कमलाप्रसाद कभी ऐसी शरारत न करता। कौशल से काम निकल सकता था,
को दौड़ा गया था। एक घंटे के बाद सड़क पर से एक बग्घी निकली। मालूम हुआ, बदरीप्रसाद आ गए। आपस में क्या बातें हो रही होंगी? शायद थाने में उसकी इत्तला की गई हो। बगीचे से एक ताँगा निकलता हुआ दिखाई दिया। शायद वह डॉक्टर होगा। चोट तो ऐसी नहीं आई लेकिन बड़े आदमियों के लिए जरा-सी बात बहुत हो जाती है।
अध्याय 13
इस वक्त पूर्णा को अपनी उद्दंडता पर पश्चाताप हुआ। उसने अगर जरा धैर्य से काम लिया होता तो कमलाप्रसाद कभी ऐसी शरारत न करता। कौशल से काम निकल सकता था,