प्रतिज्ञा - Pratigya

वह चौंक पड़ती। सड़क पर चलने वालों की परछाई नाले में पड़ते देख कर उसकी आँखों में अँधेरा-सा छा जाता। कहीं उसे पकड़ने कोई न आता हो। अगर कोई आ गया तो, वह क्या करेगी? उसने एक ईंट अपने पास रख ली थी। इसी ईंट को वह अपने सिर पर पटक देगी। पुलिस वालों के पंजे में फँसने से सिर पटक कर मर जाना कहीं अच्छा था। सड़क पर आने-जाने वालों की हलचल सुनाई दे रही थी। उनकी बातें भी कभी-कभी कानों में पड़ जाती थीं। एक माली बदरीप्रसाद को खबर देने


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वह चौंक पड़ती। सड़क पर चलने वालों की परछाई नाले में पड़ते देख कर उसकी आँखों में अँधेरा-सा छा जाता। कहीं उसे पकड़ने कोई न आता हो। अगर कोई आ गया तो, वह क्या करेगी? उसने एक ईंट अपने पास रख ली थी। इसी ईंट को वह अपने सिर पर पटक देगी। पुलिस वालों के पंजे में फँसने से सिर पटक कर मर जाना कहीं अच्छा था। सड़क पर आने-जाने वालों की हलचल सुनाई दे रही थी। उनकी बातें भी कभी-कभी कानों में पड़ जाती थीं। एक माली बदरीप्रसाद को खबर देने


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