प्रतिज्ञा - Pratigya

अमृतराय का हाथ पकड़ लिया और बोले - 'फिर सोच लो, ऐसा न हो पीछे पछताना पड़े।'

यह संकेत किसकी ओर था, दाननाथ से छिपा न रह सका। जब अमृतराय की पहली स्त्री जीवित थी, उसी समय दाननाथ से प्रेमा के विवाह की बातचीत हुई थी। जब प्रेमा की बहन का देहांत हो गया तो उसके पिता लाला बदरीप्रसाद ने दाननाथ की ओर से मुँह फेर लिया । दाननाथ विद्या, धन और प्रतिष्ठा किसी बात में भी अमृतराय की बराबरी न कर सकते थे। सबसे बड़ी बात यह थी कि प्रेमा भी


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अमृतराय का हाथ पकड़ लिया और बोले - 'फिर सोच लो, ऐसा न हो पीछे पछताना पड़े।'

यह संकेत किसकी ओर था, दाननाथ से छिपा न रह सका। जब अमृतराय की पहली स्त्री जीवित थी, उसी समय दाननाथ से प्रेमा के विवाह की बातचीत हुई थी। जब प्रेमा की बहन का देहांत हो गया तो उसके पिता लाला बदरीप्रसाद ने दाननाथ की ओर से मुँह फेर लिया । दाननाथ विद्या, धन और प्रतिष्ठा किसी बात में भी अमृतराय की बराबरी न कर सकते थे। सबसे बड़ी बात यह थी कि प्रेमा भी


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