एक बूढ़े आदमी को देख कर वह एक वृक्ष की आड़ में खड़ी हो गई जब बूढ़ा निकट आ गया और पूर्णा को विश्वास हो गया कि इसके सामने निकलने में कोई भय नहीं है, तो उसने धीरे से पूछा - 'बाबा, गंगा जी का रास्ता किधर है?'
पूर्णा - 'गंगा जी यहाँ से कितनी दूर हैं?'
इस दशा में दो कोस जाना पूर्णा को असह्य-सा जान पड़ा। उसने सोचा, क्या डूबने के लिए गंगा ही है। यहाँ कोई तालाब या नदी न होगी? वह वहीं खड़ी रही। कुछ निश्चय न कर सकी।
पूर्णा सहम उठी। अब तक उसने कोई कथा न गढ़ी थी,
एक बूढ़े आदमी को देख कर वह एक वृक्ष की आड़ में खड़ी हो गई जब बूढ़ा निकट आ गया और पूर्णा को विश्वास हो गया कि इसके सामने निकलने में कोई भय नहीं है, तो उसने धीरे से पूछा - 'बाबा, गंगा जी का रास्ता किधर है?'
पूर्णा - 'गंगा जी यहाँ से कितनी दूर हैं?'
इस दशा में दो कोस जाना पूर्णा को असह्य-सा जान पड़ा। उसने सोचा, क्या डूबने के लिए गंगा ही है। यहाँ कोई तालाब या नदी न होगी? वह वहीं खड़ी रही। कुछ निश्चय न कर सकी।
पूर्णा सहम उठी। अब तक उसने कोई कथा न गढ़ी थी,