क्या बतलाती?
पूर्णा ने डरते-डरते कहा- 'वहीं एक मुहल्ले में जाऊँगी?'
पूर्णा ने कोई जवाब न दिया। उसके पास जवाब ही क्या था?
पूर्णा कोई जवाब न दे सकी। वह पछता रही थी कि नाहक इस बूढ़े को मैंने छेड़ा।
पूर्णा थर-थर काँप रही थी। एक शब्द भी मुँह से न निकाल सकी।
पूर्णा के लिए अब जवाब देना लाजिम हो गया। बोली - 'बाबा, मुझे घरवालों ने निकाल दिया है।'
'नहीं बाबा, मैं विधवा हूँ। घरवाले मुझे रखना नहीं चाहते।'
'नहीं बाबा,
क्या बतलाती?
पूर्णा ने डरते-डरते कहा- 'वहीं एक मुहल्ले में जाऊँगी?'
पूर्णा ने कोई जवाब न दिया। उसके पास जवाब ही क्या था?
पूर्णा कोई जवाब न दे सकी। वह पछता रही थी कि नाहक इस बूढ़े को मैंने छेड़ा।
पूर्णा थर-थर काँप रही थी। एक शब्द भी मुँह से न निकाल सकी।
पूर्णा के लिए अब जवाब देना लाजिम हो गया। बोली - 'बाबा, मुझे घरवालों ने निकाल दिया है।'
'नहीं बाबा, मैं विधवा हूँ। घरवाले मुझे रखना नहीं चाहते।'
'नहीं बाबा,