प्रतिज्ञा - Pratigya



पूर्णा इस समय अपने को गंगा की लहरों में विसर्जित करने जाती, तो कदाचित इतनी दुःखी और सशंक न होती।


अध्याय 14

बाबू दाननाथ के स्वभाव में मध्यम न था। वह जिससे मित्रता करते थे, उसके दास बन जाते थे, उसी भाँति जिसका विरोध करते थे, उसे मिट्टी में मिला देना चाहते थे। कई महीने तक वह कमलाप्रसाद के मित्र बने रहे। बस, जो कुछ थे कमलाप्रसाद थे। उन्हीं के साथ घूमना, उन्हीं के साथ उठना-बैठना। अमृतराय की सूरत से भी घृणा थी - उन्हीं


265 of 305



पूर्णा इस समय अपने को गंगा की लहरों में विसर्जित करने जाती, तो कदाचित इतनी दुःखी और सशंक न होती।


अध्याय 14

बाबू दाननाथ के स्वभाव में मध्यम न था। वह जिससे मित्रता करते थे, उसके दास बन जाते थे, उसी भाँति जिसका विरोध करते थे, उसे मिट्टी में मिला देना चाहते थे। कई महीने तक वह कमलाप्रसाद के मित्र बने रहे। बस, जो कुछ थे कमलाप्रसाद थे। उन्हीं के साथ घूमना, उन्हीं के साथ उठना-बैठना। अमृतराय की सूरत से भी घृणा थी - उन्हीं


265 of 305