प्रतिज्ञा - Pratigya

के विषय में कोई बात सुनी? अभी महरी न जाने कहाँ से ऊटपटाँग बातें सुन आई है। मुझे तो विश्वास नहीं आता।'

'तुमने भी कुछ सुना है?'

'तो सचमुच भैया जी पूर्णा को बगीचे ले गए थे?'

'पूर्णा ने भैया को मार कर गिरा दिया, यह भी सच है?'

'तुमसे किसने कहा?'

'पिता जी की न पूछो। वह तो भैया पर उधार ही खाए रहते हैं।'

'नहीं, यह मैं नहीं कहती; मगर भैया में ऐसी आदत कभी न थी।'

प्रेमा ने एक क्षण सोच कर संदिग्ध भाव से कहा - 'मुझे


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के विषय में कोई बात सुनी? अभी महरी न जाने कहाँ से ऊटपटाँग बातें सुन आई है। मुझे तो विश्वास नहीं आता।'

'तुमने भी कुछ सुना है?'

'तो सचमुच भैया जी पूर्णा को बगीचे ले गए थे?'

'पूर्णा ने भैया को मार कर गिरा दिया, यह भी सच है?'

'तुमसे किसने कहा?'

'पिता जी की न पूछो। वह तो भैया पर उधार ही खाए रहते हैं।'

'नहीं, यह मैं नहीं कहती; मगर भैया में ऐसी आदत कभी न थी।'

प्रेमा ने एक क्षण सोच कर संदिग्ध भाव से कहा - 'मुझे


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