केवल उसका अपमान करने के लिए यह चोट की गई है। अगर इस बात को सच भी मान लिया जाए, तो भी ऐसी जली-कटी बातें करने का प्रयोजन? क्या ये बातें दिल में रखी जा सकती थीं?
एक क्षण के बाद दाननाथ ने कहा - 'जी चाहता हो, तो जा कर देख आओ। चोट तो ऐसी गहरी नहीं है, पर मक्कर ऐसा किए हुए हैं, मानो गोली लग गई हो।'
'नहीं भाई, मैं किसी को रोकता नहीं। ऐसा न हो, पीछे से कहने लगो तुमने जाने न दिया। मैं बिल्कुल नहीं रोकता।'
'हाँ, इच्छा न होगी,
केवल उसका अपमान करने के लिए यह चोट की गई है। अगर इस बात को सच भी मान लिया जाए, तो भी ऐसी जली-कटी बातें करने का प्रयोजन? क्या ये बातें दिल में रखी जा सकती थीं?
एक क्षण के बाद दाननाथ ने कहा - 'जी चाहता हो, तो जा कर देख आओ। चोट तो ऐसी गहरी नहीं है, पर मक्कर ऐसा किए हुए हैं, मानो गोली लग गई हो।'
'नहीं भाई, मैं किसी को रोकता नहीं। ऐसा न हो, पीछे से कहने लगो तुमने जाने न दिया। मैं बिल्कुल नहीं रोकता।'
'हाँ, इच्छा न होगी,