के लिए अब वहाँ खड़ा रहना असंभव था। फाटक में दाखिल हुए। बूढ़ा इन्हें देखते ही झुक कर सलाम करता हुआ बोला - 'आओ भैया, बहुत दिनन माँ सुधि लिहेव। बाबू रोज तुम्हार चर्चा कर-कर पछतात रहे। तुमका देखि के फूले न समैहें। मजे में तो रह्यो - जाए के बाबू से कह देई।'
दाननाथ ने कहा- 'तुम मुझसे बहुत नाराज होगे।'
दाननाथ ने इस बात का कुछ जवाब न दे कर कहा - 'तुम मुझे इतना बता दो कि तुमने मुझे क्षमा कर दिया या नहीं? मैंने तुम्हारे साथ बड़ी नीचता की है।'
के लिए अब वहाँ खड़ा रहना असंभव था। फाटक में दाखिल हुए। बूढ़ा इन्हें देखते ही झुक कर सलाम करता हुआ बोला - 'आओ भैया, बहुत दिनन माँ सुधि लिहेव। बाबू रोज तुम्हार चर्चा कर-कर पछतात रहे। तुमका देखि के फूले न समैहें। मजे में तो रह्यो - जाए के बाबू से कह देई।'
दाननाथ ने कहा- 'तुम मुझसे बहुत नाराज होगे।'
दाननाथ ने इस बात का कुछ जवाब न दे कर कहा - 'तुम मुझे इतना बता दो कि तुमने मुझे क्षमा कर दिया या नहीं? मैंने तुम्हारे साथ बड़ी नीचता की है।'