भी सुनहले आभूषण पहने मधुर स्वरों में गा रही थीं। आश्रम का विशाल भवन सूर्यदेव के आशीर्वाद में नहाया हुआ खड़ा था।
अमृतराय ने पूछा - 'किस विषय में?'
अमृतराय - 'मेरी शादी की चिंता में तुम क्यों पड़े हुए हो?'
अमृतराय - 'मैं अपनी प्रतिज्ञा पूरी कर चुका।'
अमृतराय - 'नहीं, सच!'
अमृतराय - 'कर चुका, सच कहता हूँ।'
अमृतराय - 'जी नहीं, खूब ढोल बजा कर किया और स्त्री भी ऐसी पाई, जिस पर सारा देश मोहित है?'
अमृतराय - 'जी हाँ, अप्सराओं से भी सुंदर?'
भी सुनहले आभूषण पहने मधुर स्वरों में गा रही थीं। आश्रम का विशाल भवन सूर्यदेव के आशीर्वाद में नहाया हुआ खड़ा था।
अमृतराय ने पूछा - 'किस विषय में?'
अमृतराय - 'मेरी शादी की चिंता में तुम क्यों पड़े हुए हो?'
अमृतराय - 'मैं अपनी प्रतिज्ञा पूरी कर चुका।'
अमृतराय - 'नहीं, सच!'
अमृतराय - 'कर चुका, सच कहता हूँ।'
अमृतराय - 'जी नहीं, खूब ढोल बजा कर किया और स्त्री भी ऐसी पाई, जिस पर सारा देश मोहित है?'
अमृतराय - 'जी हाँ, अप्सराओं से भी सुंदर?'