प्रतिज्ञा - Pratigya



अमृतराय - 'इसके साथ मेरा जीवन बड़े आनंद से कट जाएगा। यह एक पत्नीव्रत का समय है। बहु-विवाह के दिन गए।'

अमृत के हाथ रुक गए। उन्हें डाँड़ चलाने की सुधि न रही। बोले - 'यह तुम्हें उसी वक्त समझ लेना चाहिए था, जब मैंने प्रेमा की उपासना छोड़ी। प्रेमा समझ गई थी। चाहे पूछ लेना।

पृथ्वी ने श्यामवेश धारण कर लिया था और बजरा लहरों पर थिरकता हुआ चला जाता था। उसी बजरे की भाँति अमृतराय का हृदय भी आंदोलित हो रहा था, दाननाथ निस्पंद बैठे हुए थे,


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अमृतराय - 'इसके साथ मेरा जीवन बड़े आनंद से कट जाएगा। यह एक पत्नीव्रत का समय है। बहु-विवाह के दिन गए।'

अमृत के हाथ रुक गए। उन्हें डाँड़ चलाने की सुधि न रही। बोले - 'यह तुम्हें उसी वक्त समझ लेना चाहिए था, जब मैंने प्रेमा की उपासना छोड़ी। प्रेमा समझ गई थी। चाहे पूछ लेना।

पृथ्वी ने श्यामवेश धारण कर लिया था और बजरा लहरों पर थिरकता हुआ चला जाता था। उसी बजरे की भाँति अमृतराय का हृदय भी आंदोलित हो रहा था, दाननाथ निस्पंद बैठे हुए थे,


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