रहती। यह शर्त कर देता कि मूल में से कुछ न दिया जाए।'
सहसा कमलाप्रसाद आँखें मलते हुए आ कर खड़े हो गए और बोले - 'अभी आप सोए नहीं? गरमी लगती हो, तो पंखा ला कर रख दूँ। रात तो ज्यादा हो गई।'
बदरीप्रसाद - 'नहीं गरमी नहीं है। प्रेमा से कुछ बातें करने लगा था। तुमसे भी कुछ सलाह लेना चाहता था, तो तुम आप ही आ गए। मैं यह सोच रहा हूँ कि पूर्णा यहीं आ कर रहे तो क्या हरज है?'
कमलाप्रसाद ने आँखें फाड़ कर कहा - 'यहाँ! अम्माँ जी कभी न राजी होंगी।'
रहती। यह शर्त कर देता कि मूल में से कुछ न दिया जाए।'
सहसा कमलाप्रसाद आँखें मलते हुए आ कर खड़े हो गए और बोले - 'अभी आप सोए नहीं? गरमी लगती हो, तो पंखा ला कर रख दूँ। रात तो ज्यादा हो गई।'
बदरीप्रसाद - 'नहीं गरमी नहीं है। प्रेमा से कुछ बातें करने लगा था। तुमसे भी कुछ सलाह लेना चाहता था, तो तुम आप ही आ गए। मैं यह सोच रहा हूँ कि पूर्णा यहीं आ कर रहे तो क्या हरज है?'
कमलाप्रसाद ने आँखें फाड़ कर कहा - 'यहाँ! अम्माँ जी कभी न राजी होंगी।'