प्रतिज्ञा - Pratigya

नेत्रों से पिता की ओर देख कर कहा - 'बड़े मजे से। पंडित जी पचास रुपए ही तो पाते थे।'

बदरीप्रसाद ने चिंतित भाव से कहा - 'मेरे लिए बीस, पच्चीस, साठ सब बराबर हैं, लेकिन मुझे अपनी जिंदगी ही की तो नहीं सोचनी है। अगर आज मैं न रहूँ, तो कमलाप्रसाद कौड़ी फोड़ कर न देगा, इसलिए कोई स्थायी बंदोबस्त कर जाना चाहता हूँ। अभी हाथ में रुपए नहीं हैं, नहीं तो कल ही चार हजार रुपए उनके नाम किसी अच्छे बैंक में रख देता। सूद से उसकी परवरिश होती


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नेत्रों से पिता की ओर देख कर कहा - 'बड़े मजे से। पंडित जी पचास रुपए ही तो पाते थे।'

बदरीप्रसाद ने चिंतित भाव से कहा - 'मेरे लिए बीस, पच्चीस, साठ सब बराबर हैं, लेकिन मुझे अपनी जिंदगी ही की तो नहीं सोचनी है। अगर आज मैं न रहूँ, तो कमलाप्रसाद कौड़ी फोड़ कर न देगा, इसलिए कोई स्थायी बंदोबस्त कर जाना चाहता हूँ। अभी हाथ में रुपए नहीं हैं, नहीं तो कल ही चार हजार रुपए उनके नाम किसी अच्छे बैंक में रख देता। सूद से उसकी परवरिश होती


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