जो तुम करो। मेरा क्या ठिकाना? आज मैं कुछ कर जाऊँ, कल मेरी आँख बंद होते ही तुम उलट-पुलट दो, व्यर्थ में बदनामी हो।'
कमलाप्रसाद ने बहुत दुःखित हो कर कहा - 'आप मुझे इतना नीच समझते हैं। यह मुझे न मालूम था।'
बदरीप्रसाद बेटे को बहुत प्यार करते थे, यह देख कर कि मेरी बात से उसे चोट लगी है, तुरंत बात बनाई - 'नहीं-नहीं मैं तुम्हें नीच नहीं समझता। बहुत संभव है कि आज हम जो बात कर सकते हैं, वह कल स्थिति के बदल जाने से न कर सकें।'
जो तुम करो। मेरा क्या ठिकाना? आज मैं कुछ कर जाऊँ, कल मेरी आँख बंद होते ही तुम उलट-पुलट दो, व्यर्थ में बदनामी हो।'
कमलाप्रसाद ने बहुत दुःखित हो कर कहा - 'आप मुझे इतना नीच समझते हैं। यह मुझे न मालूम था।'
बदरीप्रसाद बेटे को बहुत प्यार करते थे, यह देख कर कि मेरी बात से उसे चोट लगी है, तुरंत बात बनाई - 'नहीं-नहीं मैं तुम्हें नीच नहीं समझता। बहुत संभव है कि आज हम जो बात कर सकते हैं, वह कल स्थिति के बदल जाने से न कर सकें।'