प्रतिज्ञा - Pratigya

में एक से एक पड़े हुए हैं। मैं कल ही तुम्हारे बाबूजी को भेजती हूँ।'

प्रेमा ने जमीन की तरफ देखते हुए कहा - 'नहीं अम्माँ जी, मेरे लिए आप कोई फिक्र न करें। मैंने क्वाँरी रहने का निश्चय कर लिया है।'

कमलाप्रसाद ने आते-ही-आते कहार से पूछा - 'बरफ लाए?'

कमलाप्रसाद ने गरज कर कहा - 'जोर से बोलो, बरफ लाए कि नहीं? मुँह में आवाज नहीं है?'

कहार ने देखा कि अब बिना मुँह खोले कानों के उखड़ जाने का भय है, तो धीरे से बोला - 'नहीं, सरकार।'


5 of 305

में एक से एक पड़े हुए हैं। मैं कल ही तुम्हारे बाबूजी को भेजती हूँ।'

प्रेमा ने जमीन की तरफ देखते हुए कहा - 'नहीं अम्माँ जी, मेरे लिए आप कोई फिक्र न करें। मैंने क्वाँरी रहने का निश्चय कर लिया है।'

कमलाप्रसाद ने आते-ही-आते कहार से पूछा - 'बरफ लाए?'

कमलाप्रसाद ने गरज कर कहा - 'जोर से बोलो, बरफ लाए कि नहीं? मुँह में आवाज नहीं है?'

कहार ने देखा कि अब बिना मुँह खोले कानों के उखड़ जाने का भय है, तो धीरे से बोला - 'नहीं, सरकार।'


5 of 305