प्रतिज्ञा - Pratigya



कहार - 'पैसे न थे।'

कहार - 'हाँ हुजूर, किसी ने सुना नहीं।'

कमलाप्रसाद ने कपड़े भी नहीं उतारे। क्रोध में भरे हुए घर में आ कर माँ से पूछा - 'क्या अम्माँ, बदलू तुमसे बर्फ के लिए पैसे लेने आया था?'

कमलाप्रसाद - 'नहीं, उनसे तो भेंट नहीं हुई। उनकी तरफ गया तो था, लेकिन जब सुना कि वह किसी सभा में गए हैं, तो मैं सिनेमा चला गया। सभाओं का तो उन्हें रोग है और मैं उन्हें बिल्कुल फिजूल समझता हूँ। कोई फायदा नहीं। बिना व्याख्यान


6 of 305



कहार - 'पैसे न थे।'

कहार - 'हाँ हुजूर, किसी ने सुना नहीं।'

कमलाप्रसाद ने कपड़े भी नहीं उतारे। क्रोध में भरे हुए घर में आ कर माँ से पूछा - 'क्या अम्माँ, बदलू तुमसे बर्फ के लिए पैसे लेने आया था?'

कमलाप्रसाद - 'नहीं, उनसे तो भेंट नहीं हुई। उनकी तरफ गया तो था, लेकिन जब सुना कि वह किसी सभा में गए हैं, तो मैं सिनेमा चला गया। सभाओं का तो उन्हें रोग है और मैं उन्हें बिल्कुल फिजूल समझता हूँ। कोई फायदा नहीं। बिना व्याख्यान


6 of 305